देहरादून। इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर ट्रेनिंग एंड रिसर्च (IATR), एवं पुरस्कार समारोह “कृषि उद्यमी सम्मान – 2026” का गरिमामय आयोजन किया गया। इस वर्ष की संगोष्ठी का केंद्रीय विषय “सतत हिमालय के लिए युवा कृषि उद्यमी” रहा, जो हिमालयी कृषि के भविष्य को युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और उद्यमशीलता से जोड़ने के संकल्प को दर्शाता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। समारोह में कृषि वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, प्रगतिशील किसानों, उद्यमियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की। इस मंच ने वैज्ञानिक अनुसंधान, व्यावहारिक कृषि, शिक्षा और उद्यमशीलता के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने का कार्य किया।
टिहरी गढ़वाल के राजेश थापलियाल एवं पूजा थापलियाल, उद्यम – देवभूमि नेचुरल्स फ्रूट प्रोडक्ट्स को प्रदान किया गया। स्थानीय फल संसाधनों के मूल्य संवर्धन और ग्रामीण आजीविका सृजन में उनके योगदान के लिए मुख्य अतिथि किशोर उपाध्याय ने उन्हें सम्मानित किया।
उत्तरकाशी के श्रीकोट की दीपिका कैंतुरा, उद्यम – दीप मशरूम फार्म को मिला। मशरूम उत्पादन को कृषि विविधीकरण का सशक्त मॉडल बनाया है। उन्हें पद्मश्री डॉ. प्रेमचंद शर्मा जी ने सम्मानित किया।
देहरादून के चकराता क्षेत्र के कांडी गाँव के राजवीर सिंह, उद्यम – गौरा वैली ऑर्चर्ड्स को प्रदान किया – सेब, आलूबुखारा और पर्सिमन के पौधों के साथ उच्च मूल्य बागवानी का उनका मॉडल हिमालयी फल उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्हें श्री विजय जड़धारी जी ने सम्मानित किया।
सभी विजेताओं ने अपने उद्यम की यात्रा और चुनौतियों को साझा किया।
समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले शिक्षाविदों को “शिक्षा गौरव सम्मान” से अलंकृत किया गया। सम्मानित होने वालों में श्री वी.के. ओझा जी (UCOST), डॉ. मनीषा फोगाट (देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय), डॉ. राजेंद्र प्रसाद (उत्तरांचल विश्वविद्यालय), डॉ. अलका आर्या (अल्पाइन ग्रुप), डॉ. राकेश नेगी (BFIT), डॉ. गरिमा कौशिक (GRD), डॉ. प्रेरणा (DD कॉलेज), श्री मनीष कुमार (हरि ओम सरस्वती कॉलेज), डॉ. शंभू प्रसाद (शिवालिक विश्वविद्यालय), डॉ. विजय (तुलाज़ विश्वविद्यालय), श्री नील मणि (शिवांश फार्म) और डॉ. के.डी. पुरोहित (गढ़वाल विश्वविद्यालय) शामिल रहे। यह सम्मान डॉ. एच.एल. उपाध्याय जी एवं पद्मश्री डॉ. प्रेमचंद शर्मा जी द्वारा प्रदान किया गया। समारोह में हिमालयी क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि किशोर उपाध्याय जी, अध्यक्ष, ग्लोबल हिमालयन यूनियन एवं माननीय विधायक, टिहरी गढ़वाल रहे। उनका स्वागत मनमोहन सिंह बिष्ट जी, पूर्व उप-प्रभागीय वन अधिकारी द्वारा किया गया।
मुख्य संरक्षक एवं KUS अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. प्रेमचंद शर्मा जी, जिन्हें “अनारवाला शर्मा जी” के नाम से जाना जाता है, की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष प्रेरणा दी। जैविक खेती और बागवानी नवाचार में उनके योगदान को सभी ने नमन किया। उनका स्वागत IATR के CEO श्री अमित उपाध्याय जी ने किया।
विशिष्ट अतिथियों में डॉ. जे.एम.एस. तोमर जी, प्रिंसिपल साइंटिस्ट एवं विभागाध्यक्ष, ICAR-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (IISWC), श्री कुलदीप गैरोला जी, पूर्व अपर निदेशक, विद्यालयी शिक्षा विभाग एवं संस्थापक सक्सेस पाथ क्लासेज, श्री विजय जड़धारी जी, प्रसिद्ध किसान, पर्यावरणविद्, लेखक एवं बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता, तथा डॉ. एच.एल. उपाध्याय जी, पूर्व कुलसचिव, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय एवं संरक्षक IATR शामिल रहे। सभी अतिथियों का स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया।
स्वागत संबोधन IATR के CEO अमित उपाध्याय जी ने प्रस्तुत किया। उन्होंने IATR के उद्देश्यों और हिमालयी क्षेत्र में युवा कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।
डॉ. जे.एम.एस. तोमर ने मृदा एवं जल संरक्षण, वानिकी और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर अपने शोध अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि हिमालयी क्षेत्र में संसाधनों का सतत प्रबंधन ही कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता का आधार है। शुष्क भूमि कृषि में वसंतराव नाइक पुरस्कार से सम्मानित डॉ. तोमर के 25 राष्ट्रीय और 7 अंतरराष्ट्रीय शोध प्रकाशन इस क्षेत्र में मार्गदर्शक हैं।